अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम सीमाओं पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए रुद्रप्रयाग जनपद के आगर गाँव निवासी और 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात हवलदार रविन्द्र सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गाँव पहुँचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के रोने-बिलखने और ग्रामीणों की चीख-पुकार से माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। हर आँख नम थी और हर जुबान पर वीर सपूत के बलिदान की चर्चा थी।
इसके पश्चात शहीद रविन्द्र सिंह का अंतिम संस्कार अलकनंदा और मंदाकिनी नदी के पावन संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीद को अंतिम सलामी दी। इस दौरान “जब तक सूरज चांद रहेगा, रविन्द्र सिंह तेरा नाम रहेगा” जैसे नारों से संगम तट गूंज उठा और देशभक्ति का वातावरण भावुक कर देने वाला रहा।
शहीद को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
परिजनों ने बताया कि हवलदार रविन्द्र सिंह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार का कहना है कि रविन्द्र सिंह ने सदैव देशसेवा को सर्वोपरि रखा और कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह बलिदान न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जनपद और राष्ट्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
वीर सपूत की शहादत से रुद्रप्रयाग जनपद शोक में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी ओर हर नागरिक को अपने इस सपूत पर गर्व भी है, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।





