आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा में रुद्रप्रयाग पहुंची जूना अखाड़ा की छड़ी यात्रा, भक्ति और आस्था के संगम में डूबा नगर…..

रुद्रप्रयाग । हर साल की तरह इस बार भी श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की पवित्र छड़ी यात्रा गुरुवार को रुद्रप्रयाग पहुंची, जहां इसका स्वागत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के अद्भुत संगम के साथ हुआ। जैसे ही यह यात्रा नगर में प्रवेश कर रही थी, पूरा वातावरण “हर हर महादेव” और “जय श्री शंकराचार्य” के जयघोष से गूंज उठा।

यह ऐतिहासिक यात्रा आदि गुरु शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा की स्मृति में निकाली जाती है, वही यात्रा जिसके माध्यम से उन्होंने पूरे भारतवर्ष में भ्रमण कर सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की थी। उस समय जब मठ-मंदिरों पर अत्याचार हुए और बद्रीनाथ जी की मूर्ति तक को नारद कुंड में फेंक दिया गया था, तब आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म की ज्योति पुनः प्रज्वलित की थी। उसी परंपरा के निर्वाह हेतु जूना अखाड़ा हर वर्ष चारों धामों के मार्ग से यह छड़ी यात्रा निकालता है। इस बार यात्रा गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के बाद केदारनाथ धाम की ओर बढ़ रही है। रुद्रप्रयाग पहुंचने के बाद यह पहले कोटेश्वर महादेव मंदिर जाएगी और फिर बाबा केदार की ओर प्रस्थान करेगी। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर वीरेंद्र महाराज ने कहा कि यह यात्रा धर्म और संस्कृति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। उन्होंने कहा कि हिमालय को अनियंत्रित निर्माण और आपदाओं से बचाना हम सबका कर्तव्य है,जनपद आगमन पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और सनातन धर्म के अनुयायी भारी संख्या में मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से साधु-संतों का भव्य स्वागत किया और पूरा नगर छड़ी यात्रा की भक्ति में सराबोर हो गया।
वही रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। उन्होंने स्थानीय बाध्य यंत्रो बैंड के साथ रुद्रप्रयाग से कोटेश्वर तक यात्रा में पैदल चलते हुए सभी संतों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है। यह छड़ी यात्रा कुल 32 दिनों की है जो उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ जैसे जिलों से होकर 22 अक्टूबर को आदि कैलाश ओम पर्वत पहुंचेगी।

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