रुद्रप्रयाग में गरजे हरीश रावत — बोले, धामी भाजपा के डैमेज हीरो, हरक सिंह के पास भाजपा से जुड़े अहम दस्तावेज

रुद्रप्रयाग: पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत सोमवार को रुद्रप्रयाग पहुंचे, जहां पत्रकारों से वार्ता में राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उनका कहना था कि इस वर्ष उत्तराखंड में 2013 जैसी भीषण आपदाएं आईं, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक राहत और मुआवजा नहीं मिला है। रावत ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन बीजेपी नेताओं के इंतज़ार में है कि जब वे आएंगे, तब राहत वितरित होगी?
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि दीपावली तक प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो कांग्रेस “न्याय यात्रा” निकालकर सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने कहा कि आपदा सहायता के मानक दस वर्षों से नहीं बदले हैं। हमारी सरकार ने जो मानक बनाए थे, अब समय आ गया है कि उन्हें ढाई गुना बढ़ाया जाए।
रावत ने बताया कि वह जल्द रुद्रप्रयाग के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उनके अनुसार, काफी समय बीत जाने के बावजूद अब तक कई लापता लोगों का पता नहीं चल सका है और प्रभावित परिवारों को उनके अधिकार की सहायता नहीं मिल पाई है।
पंचायती राज आयोग को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए रावत ने मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गांवों में वास्तविक मतदाताओं को सूची से हटाया जा रहा है और बाहरी मतदाताओं को जोड़ा जा रहा है, जिनमें अधिकतर कांग्रेस समर्थक हैं। इसे उन्होंने लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया।
मंत्रिमंडल विस्तार पर टिप्पणी करते हुए रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विस्तार न करके समझदारी दिखाई, क्योंकि विस्तार से उन्हें नुकसान हो सकता है। तंज कसते हुए बोले— धामी भाजपा के डैमेज हीरो हैं, जिन्होंने राज्य को भी नुकसान पहुंचाया है।
पेपर लीक प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने कहा कि राज्य में भर्ती घोटालों की स्थिति अब आईपीएल लीग जैसी हो गई है।वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के संभावित बदलाव पर स्पष्ट किया कि इसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
हरक सिंह रावत को लेकर पूछे गए सवाल पर बोले कि हरक सिंह के पास ऐसे दस्तावेज हैं, जो सामने आ गए तो भाजपा की जड़ें हिल जाएंगी। 2016 में राज्य के लोकतंत्र को जो नुकसान हुआ, उसमें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की संलिप्तता थी, जिसकी सारी जानकारी हरक सिंह के पास है। रावत ने यह भी दोहराया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनेंगे। अपने बेटे आनंद रावत को लेकर कहा कि वह अपना रास्ता खुद तय करेंगे।
अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि उत्तराखंडियत और राज्य के आत्मसम्मान की लड़ाई है।

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