जनपद रुद्रप्रयाग के मैखंडा क्षेत्र में भालू के हमले से मवेशियों के शिकार होने की घटना के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि एक सप्ताह पहले पकड़े गए भालू को विभाग ने ‘बेगुनाह’ बताते हुए छोड़ दिया था और उसकी इसी रिहाई के बाद अब मवेशियों पर हमला हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की ओर से थाली बजाने, मिर्ची का धुआं करने जैसी औपचारिक सलाहें दी जाती हैं, जबकि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और जान-माल का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों ने इसे विभागीय चूक बताते हुए जिलाधिकारी से भालू छोड़ने के निर्णय पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने तक की मांग उठाई है, जिससे क्षेत्र में तनाव और गुस्से का माहौल बना हुआ है।
उधर वन विभाग और प्रशासन की ओर से सामने आए पत्र में स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 28 नवंबर को विशेष बैठक आयोजित कर भालू और गुलदार की गतिविधियों वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे और ग्रामीणों में जागरूकता अभियान चलाने, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन तेज करने को प्राथमिकता दी गई थी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि भालू को उसके व्यवहार और परिस्थितियों के आधार पर ही पहले छोड़ा गया था और अब नई घटना के बाद टीमें मौके पर भेज दी गई हैं, जिनके द्वारा लगातार ट्रैकिंग और बचाव कार्य किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जंगली जानवरों की बढ़ी गतिविधि पूरे क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई है और सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जा रहा है ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
ग्रामीणों के भारी आक्रोश और वन विभाग की सफाई के बीच यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है और क्षेत्र में मानव–वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चिंता का विषय बनकर उभर रहा है, जहां लोग सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं और विभाग लगातार हालात संभालने में जुटा हुआ है।






