रुद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय स्थित सरस्वती विद्या मंदिर बेलनी एवं सरस्वती शिशु मंदिर बेलनी में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरस्वती माता पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए। कार्यक्रम में छात्र–छात्राओं के साथ बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भी सहभागिता की। प्रातः काल से ही विद्यालय परिसरों में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बना रहा, जहां विधिवत पूजन, हवन और शैक्षिक संस्कारों का आयोजन किया गया।
सरस्वती शिशु मंदिर बेलनी में बसंत पंचमी के साथ बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार कराया गया। इस अवसर पर हवन कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया गया। नन्हे बच्चों ने पहली बार अक्षर लेखन कर विद्या पथ पर प्रवेश किया, जिसे लेकर अभिभावकों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
सरस्वती विद्या मंदिर बेलनी के प्रधानाचार्य शशि मोहन उनियाल ने उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माघ माह की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाने की परंपरा विद्यालयों में प्रारंभ से चली आ रही है। यह दिन विद्या की देवी मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और विद्यालय परिवार के लिए इसका विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि मां सरस्वती की कृपा से ही शिक्षा का प्रकाश समाज में फैलता है, इसी भाव के साथ हर वर्ष यह आयोजन किया जाता है।
वहीं सरस्वती शिशु मंदिर बेलनी के प्रधानाचार्य गंगा दत्त जोशी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें विद्या आरंभ संस्कार एक प्रमुख संस्कार है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी आवश्यक है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। पूजा, हवन और विधा आरंभ जैसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण किया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार, शिक्षकगण और अभिभावकों ने एक स्वर में भारतीय संस्कृति, शिक्षा और संस्कारों की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।





