ग्रामीणों के धैर्य को मिला भरोसे का सहारा, तीन दिन में शासन को भेजी जाएगी सड़क निर्माण फाइल-डीएम

डीएम और विधायक के आश्वासन से टूटी अनशन की जिद, बधाणीताल–भुनालगांव सड़क निर्माण को लेकर जगी उम्मीद…

रुद्रप्रयाग। बधाणीताल से भुनालगांव मोटर मार्ग निर्माण की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से बांगर क्षेत्र के ग्रामीण लोक निर्माण विभाग रुद्रप्रयाग कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठे थे। गुरुवार को उनकी यह लड़ाई तब नई उम्मीद में बदल गई जब जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों को तीन दिनों के भीतर फॉरेस्ट क्लियरेंस के लिए फाइल शासन को भेजने का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना अनशन स्थगित कर दिया।

धरना स्थल पर जिलाधिकारी के साथ विधायक भरत चौधरी, प्रभागीय वनाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी जैन ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि “माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा स्वयं इस प्रकरण पर शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन और भारत सरकार स्तर पर इस विषय को गंभीरता से लिया जा रहा है।”

उन्होंने बताया कि बधाणीताल–भुनालगांव तक लगभग नौ किलोमीटर लंबा मोटर मार्ग निर्माण कार्य वर्ष 2021 से प्रक्रिया में है, जिसमें आठ किलोमीटर क्षेत्र वन भूमि और एक किलोमीटर सिविल भूमि आती है। इस मार्ग के निर्माण में लगभग 1271 वृक्ष प्रभावित होंगे, जिनमें बांज, बुरांश और अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। एनजीटी और वन विभाग के नियमों के अनुसार जितने क्षेत्र में मार्ग निर्माण होगा, उतनी ही भूमि पर वृक्षारोपण भी किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि वन, राजस्व और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने साढ़े तीन हेक्टेयर भूमि वृक्षारोपण के लिए चिन्हित कर ली है। उन्होंने बताया कि “कल प्रभागीय वनाधिकारी इस भूमि का स्थलीय निरीक्षण करेंगे, जो एक औपचारिक प्रक्रिया है। इसके बाद तीन दिनों के भीतर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।” उन्होंने कहा कि शासन स्तर से औपचारिकताएं पूरी होते ही एक माह के भीतर फाइल भारत सरकार को फॉरेस्ट क्लियरेंस के लिए भेज दी जाएगी और भारत सरकार से तीन माह में अनुमति दिलाने का अनुरोध किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग ने मार्ग की डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलते ही कार्य शीघ्र प्रारंभ हो सके। उन्होंने कहा, “यह मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि इस क्षेत्र को जल्द सड़क मार्ग से जोड़ा जाए। मैं स्वयं इस कार्य की प्रगति की निगरानी करूंगा ताकि कोई देरी न हो।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए शासन और जिला प्रशासन दोनों स्तरों पर भारत सरकार से फाइल पर त्वरित कार्यवाही का अनुरोध किया जाएगा।

जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने उनका आभार जताते हुए अपना आमरण अनशन स्थगित कर दिया। संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवलाल आर्य, केदार सिंह रावत और गैणू लाल ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन का यह कदम क्षेत्र के विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल है और अब उन्हें अपने लंबे समय से लंबित सपने के पूरे होने की उम्मीद है।

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