संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर जनपद रुद्रप्रयाग में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की वैचारिक, सामाजिक और राष्ट्रसेवी यात्रा को स्मरण करते हुए संघ के योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में स्वयंसेवक, मातृशक्ति, सामाजिक संगठन और आमजन शामिल हुए, जिससे आयोजन एक जनसमागम का रूप लेता दिखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटेश्वर धाम के महंत शिवानंद गिरी जी महाराज ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज को जोड़ने, संस्कारों को जीवित रखने और राष्ट्र निर्माण में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संघ उत्तराखंड प्रान्त के शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुनील जी उपस्थित रहे। उन्होंने संघ के शताब्दी पर्व को आत्ममंथन और संकल्प का अवसर बताते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज को सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने स्वयंसेवकों से अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति को जीवन का अंग बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर की दर्शन शास्त्र की प्रोफेसर कविता जी ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और राष्ट्रबोध पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन मूल्य और सांस्कृतिक चेतना ही समाज को दिशा देने का कार्य करती है, जिसे संघ ने अपने कार्यों के माध्यम से निरंतर जीवित रखा है।
सम्मेलन के दौरान स्कूली बच्चों और महिला मंगल दलों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। लोकनृत्य, देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और आयोजन में उत्सव का माहौल बना दिया। कार्यक्रम के माध्यम से न केवल संघ के शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया गया, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रप्रेम का संदेश भी जन-जन तक पहुंचाया गया।





