रुद्रप्रयाग । उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ते पलायन का असर अब गांवों की सुरक्षा और संरचना पर भी दिखाई देने लगा है। जनपद रुद्रप्रयाग की ग्राम पंचायत मयकोटी के प्रधान देवेंद्र भट्ट ने पलायन से उत्पन्न हो रही समस्याओं को लेकर चिंता जताई है।
देवेंद्र भट्ट ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गांवों से बाहर चले गए हैं। इसके चलते कई पैतृक मकान और गौशालाएं वर्षों से बंद और खंडहर अवस्था में पड़ी हैं। ये जर्जर भवन अब गांव में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि खंडहर मकान और गौशालाएं जंगली जानवरों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं। इससे गांव में निवासरत लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। इसके अलावा गांवों के बीच मौजूद बड़े और पुराने पेड़ भी आंधी-तूफान के दौरान दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। कई स्थानों पर इन पेड़ों की जड़ों से सीमेंटेड रास्तों और मकानों की नींव को भी नुकसान पहुंच रहा है।
ग्राम प्रधान ने प्रवासी परिवारों से अपील की है कि वे अपनी पैतृक संपत्तियों की नियमित देखभाल करें। जिन मकानों की स्थिति जर्जर हो चुकी है, उनकी मरम्मत कराई जाए अथवा उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाया जाए। इसी प्रकार आवासीय क्षेत्रों के समीप स्थित विशालकाय पेड़ों की समय-समय पर छंटाई भी कराई जानी चाहिए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन और प्रवासी परिवारों से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
रिपोर्ट : मानेंद्र कुमार (tehelka uk न्यूज) रुद्रप्रयाग।





