करोड़ों की मशीनें खामोश, उत्पादन शून्य! केदारनाथ यात्रा से जुड़ी योजना पर बड़े सवाल

बिपिन सेमवाल, गुप्तकाशी।

रुद्रप्रयाग । केदारनाथ धाम और यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों को गर्म पानी की सुविधा उपलब्ध कराने तथा पर्यावरण अनुकूल ईंधन (पैलेट्स) तैयार करने के उद्देश्य से स्वीकृत ₹1.45 करोड़ की परियोजना सवालों के घेरे में आ गई है। परियोजना शुरू हुए करीब तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक एक भी पैलेट्स का उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में परियोजना की प्रगति और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इस कार्य के लिए एक एनजीओ को नामित किया था। परियोजना के तहत केदारनाथ धाम और यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर गर्म पानी की व्यवस्था के लिए पैलेट्स आधारित सिस्टम स्थापित किया जाना है। इसके लिए ₹1.45 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की गई है।

सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग पर स्थित एक सरकारी शेल्टर में परियोजना से संबंधित कुछ मशीनें स्थापित की गई हैं। योजना के तहत यहां पिरुल (चीड़ की पत्तियां) और घोड़े-खच्चरों की लीद से पैलेट्स तैयार किए जाने हैं, लेकिन अभी तक उत्पादन शुरू नहीं हो सका है।

हाई फीड एनजीओ के निदेशक उदित घिल्डियाल ने बताया कि मुख्य मशीनें सोनप्रयाग में स्थापित कर दी गई हैं, जबकि केदारनाथ, लिनचोली और अन्य स्थानों पर लगाए जाने वाले बॉयलर टैंक तथा अन्य भारी उपकरण पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों और ट्रैक्टरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण कार्य प्रभावित हुआ है।

उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में सभी उपकरण संबंधित स्थानों तक पहुंचाकर तकनीकी टीम की सहायता से स्थापना का कार्य पूरा किया जाएगा। इसके बाद लिनचोली हेलीपैड और टेंट कॉलोनी में गीजर लगाए जाएंगे, जिससे तीर्थयात्रियों को गर्म पानी की सुविधा मिल सकेगी।

वहीं, पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि सोनप्रयाग में मशीनें पहुंच चुकी हैं और जल्द ही पैलेट्स निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

हालांकि, परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि तीन माह बीत जाने और बड़ी धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद अब तक उत्पादन शुरू नहीं होना चिंताजनक है। परियोजना की कुल अवधि एक वर्ष निर्धारित है, जिसमें से लगभग चार माह गुजर चुके हैं। ऐसे में समय पर लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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