रुद्रप्रयाग, 18 जुलाई। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर शुक्रवार को जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में शिक्षकों ने आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सांकेतिक धरना दिया। बाद में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा।
धरने को संबोधित करते हुए संघ के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने कहा कि आरटीई अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक उस समय निर्धारित सभी योग्यताओं को पूरा कर सेवा में आए हैं। ऐसे में वर्ष 2017 में किए गए संशोधन के आधार पर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सेवा के बीच में नियुक्ति संबंधी पात्रता परीक्षा थोपना स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।
जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि देश की अन्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बीच सेवा अवधि में ऐसी कोई पात्रता परीक्षा अनिवार्य नहीं है, जबकि शिक्षकों पर इसे लागू किया जा रहा है। प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य बीरेंद्र कठैत ने कहा कि शिक्षक संगठन लंबे समय से अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही है।
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर आगामी विधानसभा मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर देशभर के शिक्षकों के साथ संसद घेराव का कार्यक्रम चलाया जाएगा।
धरने का नेतृत्व जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने तथा संचालन जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट ने किया। इस दौरान प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य बीरेंद्र कठैत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित काला, त्रिलोक सिंह रावत, मनोज शर्मा, विजयराम गोस्वामी, अनूप नेगी, अरविंद सकलानी, शिव प्रसाद भट्ट, चारू चंद्र खंडूरी, लक्ष्मी नेगी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।





