श्री केदार शीतकालीन यात्रा का पारंपरिक शुभारम्भ , विशेष पूजा-अर्चना और जल कलश यात्रा ने बढ़ाई भव्यता।

रूद्रप्रयाग : बाबा केदारनाथ और मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से आज शीतकालीन यात्रा का विधिवत शुभारम्भ कर दिया गया। प्रातःकाल विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर परिसर में यात्रा का पारंपरिक उद्घाटन हुआ, जहाँ जिला प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति ने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इससे पहले गढ़वाल मंडल विकास निगम परिसर से ओंकारेश्वर मंदिर तक भव्य जल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें भक्तों ने आस्था और उत्साह के साथ सहभागिता की।

जिलाधिकारी प्रतीक जैन, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल और बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्देश भी दिए। अधिकारियों ने कहा कि शीतकालीन यात्रा पर्वतीय क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दे रही है और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ओंकारेश्वर मंदिर वही दिव्य स्थल माना जाता है, जहाँ श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री ऊषा का विवाह हुआ था। इसी पवित्र भूमि पर महाराजा मांधाता ने कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि यहां की पूजा का पुण्य वही फल प्रदान करता है जो हिमालय स्थित केदारनाथ और मद्महेश्वर धामों में प्राप्त होता है। पुजारी शिव शंकर लिंग ने बताया कि इन पौराणिक आस्थाओं के कारण यहां पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।

राज्य सरकार बीते वर्ष से शीतकालीन यात्रा को लेकर विशेष रूप से गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल के बाद इस यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा से न केवल देवस्थलों तक पहुंच आसान होगी बल्कि पहाड़ के स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और कृषि सामग्री को भी नया बाजार मिलेगा, जिससे हजारों लोगों की आजीविका मजबूत होगी। कृषि अधिकारी लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि शीतकालीन यात्रा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है।

उखीमठ में आज शुरू हुई यह यात्रा आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है, जहाँ स्थानीय लोग और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु मिलकर देवभूमि की इस अनूठी परंपरा को जीवंत कर रहे हैं।

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