बारिश की बेरुखी से सुलगते पहाड़,जंगलों में आग, चारों ओर धुएं का साया,स्वास्थ्य और खेती पर बढ़ता खतरा।

पहाड़ों में लंबे समय से बारिश न होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मौसम की बेरुखी ने जहां एक ओर खेती-किसानी को गहरी चोट पहुंचाई है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी चिंता का बड़ा कारण बन गई हैं। रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ, धनपुर, बचणस्यूं समेत कई क्षेत्रों में जंगलों में आग भड़क चुकी है, जिससे बीते करीब एक सप्ताह से पूरा इलाका धुएं की चादर में लिपटा हुआ है। चारों तरफ फैला यह धुआं न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है।

वनाग्नि के कारण उठने वाले धुएं से लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, सांस लेने में दिक्कत और सीने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिला चिकित्सालय में इन दिनों आंखों, सांस और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। खासतौर पर आंखों से संबंधित शिकायतें लेकर बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।

जिला चिकित्सालय में तैनात नेत्र सहायक राजेश पुरोहित के अनुसार वनाग्नि का धुआं स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन, लालपन, सूजन और पानी आने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं हृदय और सांस के रोगियों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि धुएं में मौजूद जहरीले और कैंसर कारक तत्व लंबे समय तक संपर्क में रहने पर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और ज्यादा कठिन होते जा रहे हैं। खेत सूखे पड़े हैं, फसलें प्रभावित हो रही हैं और जंगलों में लगी आग से पशुओं के चारे पर भी संकट गहराने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द बारिश या बर्फबारी नहीं हुई तो आने वाले समय में समस्याएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

अब सभी की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी होती है तो इससे न केवल जंगलों में लगी आग पर काबू पाया जा सकेगा, बल्कि किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी और पहाड़ों को एक बार फिर जीवनदायिनी नमी मिल सकेगी।

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