कपाट बंद होने के बाद भी तुंगनाथ धाम में पर्यटक,परम्पराओं के उल्लंघन का आरोप, ग्रामीणों का विरोध। प्रशासन बोला—शीतकालीन पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार,निगरानी और नियमों का भरोसा

रुद्रप्रयाग।तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भी पर्यटकों को भेजे जाने को लेकर अब विरोध तेज हो गया है। मक्कू और पाबजगपुड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों ने इसे सनातन परम्पराओं का खुला उल्लंघन बताते हुए कड़ा ऐतराज़ जताया है। ग्रामीणों के एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से मुलाकात कर मांग की कि शीतकाल में तुंगनाथ धाम में किसी भी प्रकार का पर्यटक आवागमन तत्काल रोका जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कपाट बंद होने के बाद तुंगनाथ धाम में प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहा है, लेकिन वन विभाग द्वारा पर्यटन के नाम पर पर्यटकों को भेजा जाना न सिर्फ धार्मिक परम्पराओं को ठेस पहुँचा रहा है, बल्कि बुग्याली क्षेत्रों में गंदगी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है। इससे क्षेत्र के आस्थावान लोगों की भावनाएँ आहत हो रही हैं।

वहीं जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि शिष्टमंडल की आपत्ति को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोपता और दुगलबिट्टा जैसे निचले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं और तुंगनाथ के ऊपर स्थित चन्द्रशिला ट्रैकर्स का लोकप्रिय गंतव्य है। प्रशासन की मंशा शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार सृजित करने की है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्थिति में गंदगी या अवैध गतिविधियाँ न हों।

अब सवाल यह है कि प्रशासन परम्पराओं की मर्यादा और पर्यटन से जुड़ी आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाएगा—इस पर आने वाले दिनों में सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

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