सिरोबगड़ का बदलेगा भूगोल, 50 करोड़ से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का उपचार शुरू,छह दशक पुरानी समस्या के समाधान की पहल…

रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे समय से यातायात के लिए चुनौती बने सिरोबगड़ भूस्खलन क्षेत्र के स्थायी उपचार का काम शुरू हो गया है। करीब छह दशक से भूस्खलन की समस्या से प्रभावित इस क्षेत्र के स्थायी समाधान के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न सुरक्षात्मक और स्थिरीकरण कार्य किए जाएंगे। कार्य को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सिरोबगड़ क्षेत्र में बरसात के दौरान भूस्खलन होने से ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होता रहा है। पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आने के कारण कई बार मार्ग बंद होने की स्थिति बनती है। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही चारधाम यात्रियों और अन्य यात्रियों को भी जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब उपचार कार्य शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को राहत की उम्मीद जगी है।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि सिरोबगड़ क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील रहा है। बरसात के दौरान यहां भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित होने के साथ ही यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के स्थायी उपचार का कार्य शुरू होना इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्यों के तहत भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में ढीली सामग्री और बड़े पत्थरों को हटाने के साथ ही पहाड़ी ढलान को स्थिर करने के लिए विभिन्न तकनीकी उपाय किए जाएंगे। रॉकफॉल और मलबे के बहाव को रोकने के लिए बैरियर लगाए जाएंगे। इसके अलावा रॉक एंकरिंग, पहाड़ी ढलान पर सीसी क्लैडिंग वॉल, नदी की ओर निचले हिस्से में कंक्रीट मैट्रेस तथा माइक्रोपाइल आधारित सीसी वॉल का निर्माण किया जाएगा। घाटी की ओर माइक्रोपाइल आधारित आरसीसी कैंटिलीवर रिटेनिंग वॉल भी बनाई जाएगी।

इन सुरक्षात्मक और स्थिरीकरण कार्यों के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी ढलान को मजबूत करने तथा सड़क पर मलबा और पत्थर गिरने की घटनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।

करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इन कार्यों को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्य पूरा होने के बाद सिरोबगड़ क्षेत्र में लंबे समय से बनी भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान के साथ ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था में भी सुधार की उम्मीद है।

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