केदारनाथ में तीन प्राचीन कुंडों के पुनर्निर्माण और गंगा आरती स्थल पर टिन शेड बनाने की मांग..

रुद्रप्रयाग। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत पोस्ती ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर केदारनाथ धाम की धार्मिक एवं पौराणिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक कार्य कराने की मांग की है।

पहले ज्ञापन में डॉ. पोस्ती ने वर्ष 2013-14 की प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त हुए उदकुंड, रेतसकुंड एवं हंसकुंड के पुनर्निर्माण के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को कार्य करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में आई विनाशकारी आपदा से कई प्राचीन धार्मिक और पौराणिक स्थल प्रभावित हुए थे। इनमें ये तीनों कुंड भी शामिल हैं। इनका संबंध धाम की धार्मिक एवं पौराणिक परंपराओं से है, इसलिए श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक विरासत को देखते हुए इनका संरक्षण एवं पुनर्निर्माण जरूरी है।

ज्ञापन में कहा गया है कि मंदिर समिति इन तीनों कुंडों का पुनर्निर्माण अपने स्तर से नियमानुसार कराना चाहती है। इसके लिए यदि जिला प्रशासन, पुरातत्व विभाग, वन विभाग, सिंचाई विभाग, पर्यटन विभाग अथवा किसी अन्य संबंधित विभाग की अनुमति, अनापत्ति या तकनीकी स्वीकृति आवश्यक हो तो संबंधित विभागों से आवश्यक कार्यवाही कराने का भी अनुरोध किया गया है। डॉ. पोस्ती ने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण कार्य के दौरान केदारनाथ धाम की धार्मिक, पौराणिक और पर्यावरणीय गरिमा के साथ प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों एवं मानकों का पालन किया जाएगा।

वहीं दूसरे ज्ञापन में दुग्ध गंगा, मधु गंगा और सरस्वती गंगा के पवित्र संगम स्थल पर मां गंगा की आरती के लिए टिन शेड और एक छोटे कक्ष का निर्माण कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया कि इस संगम स्थल पर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं द्वारा नियमित रूप से मां गंगा की आरती एवं धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। बारिश और प्रतिकूल मौसम के दौरान पर्याप्त आच्छादन एवं मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण पुरोहितों और श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

डॉ. पोस्ती ने आरती स्थल पर उपयुक्त टिन शेड, धार्मिक सामग्री रखने के लिए छोटा कक्ष अथवा स्टोर रूम, जल निकासी और फर्श जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही निर्माण कार्य को स्थानीय परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और केदारनाथ धाम की धार्मिक एवं पारंपरिक गरिमा के अनुरूप कराने की बात कही है।

उन्होंने जिलाधिकारी से दोनों प्रस्तावों की स्थलीय आवश्यकता का परीक्षण कराते हुए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति एवं स्वीकृतियां दिलाने तथा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने का अनुरोध किया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी तथा केदार सभा के पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।

डॉ. विनीत पोस्ती ने कहा कि इन कार्यों से जहां केदारनाथ धाम की प्राचीन धार्मिक विरासत के संरक्षण में मदद मिलेगी, वहीं मां गंगा की आरती जैसी धार्मिक परंपराओं को भी प्रतिकूल मौसम में सुचारू रूप से संचालित करने में सुविधा होगी।

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