आषाढ़ संक्रांति पर श्री केदारनाथ धाम में संपन्न हुआ भुकुंड भैरवनाथ हवन, क्षेत्र की खुशहाली और विश्व कल्याण की कामना

केदारनाथ। विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम में आषाढ़ संक्रांति के पावन अवसर पर सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए भुकुंड भैरवनाथ हवन विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान केदारनाथ धाम में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भुकुंड भैरवनाथ भगवान केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल और रक्षक देवता माने जाते हैं। अनादि काल से चली आ रही इस परंपरा के तहत प्रत्येक वर्ष आषाढ़ संक्रांति के दिन विशेष हवन का आयोजन किया जाता है। हवन के माध्यम से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, कृषि उन्नति, तीर्थयात्रियों की मंगलमय यात्रा तथा विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की जाती है।

इस वर्ष आयोजित हवन में केदारनाथ जी के आठ सयाना, अठारह बीसी और 360 पुरोहित परिवारों से जुड़े विभिन्न गांवों और तोकों के 31 आचार्यों ने भाग लिया। वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुए इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे और पूजा-अर्चना कर भगवान भैरवनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

केदार सभा के महामंत्री अंकित सेमवाल ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से निरंतर चली आ रही है और इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समूचे क्षेत्र की रक्षा, खुशहाली और जनकल्याण की कामना से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हवन में विश्व कल्याण, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा तथा समाज में सुख-शांति की प्रार्थना की गई।

हवन के दौरान केदारनाथ धाम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की पवित्र अग्नि और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सनातन संस्कृति के संवर्धन की दृष्टि से इस आयोजन का विशेष महत्व माना जाता है।

स्थानीय पुरोहितों और श्रद्धालुओं का मानना है कि भुकुंड भैरवनाथ हवन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि केदारघाटी की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ आगे बढ़ रहा है।

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