आदमखोर बाघ के आतंक के 100 वर्ष: गुलाबराय में इतिहास को किया याद, 15 मेधावी छात्र-छात्राएं हुए सम्मानित

रुद्रप्रयाग, 26 जुलाई। रुद्रप्रयाग के ऐतिहासिक गुलाबराय में रविवार को आदमखोर बाघ के आतंक के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कलश लोक संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से जिम कॉर्बेट, श्रीदेव सुमन एवं डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, लोक संस्कृति और शिक्षा के संरक्षण का संदेश दिया गया, वहीं जनपद के 15 मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनकी प्रतिभा का उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि उत्तराखंड का गौरवशाली इतिहास, यहां की सांस्कृतिक विरासत और महान विभूतियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरणा देने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत ने की।

समारोह में विशिष्ट अतिथि जिला पर्यटन विकास अधिकारी राहुल चौबे, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राकेश नौटियाल तथा राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग के प्राचार्य डॉ. आशुतोष त्रिपाठी मौजूद रहे। इस दौरान साहित्यकार मुरली दीवान, जगदम्बा चमोला, कार्तिकेय अग्रवाल, हेमंत चौकियाल और अखिला चमोला ने कविता पाठ एवं अपने विचार प्रस्तुत कर जिम कॉर्बेट, श्रीदेव सुमन और डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुलाबराय के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सदी पहले आदमखोर बाघ के आतंक ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया था। विश्व प्रसिद्ध शिकारी एवं प्रकृतिविद् जिम कॉर्बेट ने अपने साहस और सूझबूझ से इस आदमखोर बाघ का शिकार कर क्षेत्रवासियों को भय से मुक्ति दिलाई थी। इस ऐतिहासिक घटना ने गुलाबराय को विश्व पटल पर एक विशेष पहचान दिलाई।

समारोह में पंडित वासवानन्द मैखुरी स्मृति सम्मान के तहत जनपद के विभिन्न राजकीय विद्यालयों के 15 मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। प्रत्येक छात्र-छात्रा को संस्था की ओर से शॉल, स्मृति चिह्न तथा ₹2500 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मान का उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और शिक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी को मजबूत करना है।

शिक्षाविद् चन्द्रशेखर पुरोहित एवं कुशला नंद पुरोहित ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन ओम प्रकाश सेमवाल ने किया, जबकि आयोजन का संयोजन ओम प्रकाश सेमवाल एवं डॉ. मनीष मैखुरी ने किया।

समारोह में पर्यटन विकास विभाग, वन विभाग, साहित्यकार, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। वक्ताओं ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और शिक्षा के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन महान विभूतियों को श्रद्धांजलि और समाज में शिक्षा, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ।

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