चुनौतीपूर्ण सुरंग का निर्माण पूरा,अब सड़क मार्ग से लौट रहीं विशाल मशीनें,पहाड़ चीरकर बनाया रेल मार्ग, देवप्रयाग–ऋषिकेश सुरंग निर्माण में सफलता।

देवप्रयाग–ऋषिकेश रेल लाइन परियोजना के तहत बनाई जा रही चुनौतीपूर्ण रेल सुरंग का कार्य अब सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही सुरंग निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाली एलएंडटी की विशाल टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की विदाई का दौर शुरू हो गया है। पहाड़ के भीतर कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में लगातार काम करने वाली यह मशीन अब अपने मिशन को पूरा कर चुकी है।

सुरंग निर्माण के बाद सबसे पहले टीबीएम के कटर हेड को साइट से हटाया गया और अब इसके मेन बेयरिंग जैसे अत्यधिक भारी और तकनीकी हिस्सों को भी सड़क मार्ग से वापस ले जाया जा रहा है। सैकड़ों टन वजनी इन हिस्सों का सुरक्षित परिवहन अपने आप में एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए विशेष वाहनों, तकनीकी टीम और सटीक प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, देवप्रयाग–ऋषिकेश रेल सुरंग का निर्माण पहाड़ी भूगोल, कमजोर चट्टानों और जलस्रोतों के कारण बेहद जटिल रहा, लेकिन आधुनिक टीबीएम तकनीक की मदद से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। यह सुरंग भविष्य में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन को मजबूती देने के साथ-साथ राज्य की कनेक्टिविटी और विकास को नई गति देगी।

टीबीएम की विदाई को केवल एक मशीन के लौटने के रूप में नहीं, बल्कि उत्तराखंड के रेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण के पूर्ण होने के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पहाड़ों के बीच रेल मार्ग के सपने को और करीब ला दिया है।

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