रुद्रप्रयाग : पहाड़ों में अक्सर कहा जाता रहा है कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी, पहाड़ के काम नहीं आती”, लेकिन रुद्रप्रयाग जनपद के बसुकेदार निवासी अरुण चमोला ने इस कहावत को बदलने की ठान ली—और अब उनकी मेहनत एक मिसाल बन चुकी है।
वर्ष 2018 में अगस्त्यमुनि विकासखंड के मालतोली गांव से एक छोटे से वाटर प्लांट की शुरुआत करने वाले अरुण चमोला ने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखा। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर पानी की सप्लाई कर उन्होंने न सिर्फ अपने लिए स्वरोजगार का रास्ता बनाया, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ा।
अब इस पहल को नया विस्तार मिला है। जिला प्रशासन के सहयोग से उनका वाटर प्लांट मिनी औद्योगिक संस्थान भटवाड़ीसैंण में स्थापित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता और वितरण क्षेत्र दोनों बढ़ गए हैं। आज इस प्लांट में अरुण चमोला के परिवार के साथ-साथ तीन स्थानीय महिलाएं भी काम कर रही हैं, जिन्हें अपने घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिला है।
जहां पहले पहाड़ों में पानी की सप्लाई मुख्य रूप से मैदानी क्षेत्रों से होती थी, वहीं अब अरुण चमोला जैसे युवा इस धारणा को बदल रहे हैं। उनका प्लांट रुद्रप्रयाग के साथ-साथ चमोली जनपद तक पानी की आपूर्ति कर रहा है। खास बात यह है कि आगामी यात्रा सीजन में वे चारधाम यात्रा मार्गों पर भी अपने उत्पाद की बिक्री की योजना बना रहे हैं।
स्थानीय कामगारों में इस पहल को लेकर खासा उत्साह है। उनका कहना है कि गांव में ही रोजगार मिलने से न केवल आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि पलायन पर भी रोक लगने की उम्मीद जगी है।
अरुण चमोला की यह पहल साबित करती है कि अगर मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो पहाड़ों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। जो पानी और जवानी कभी पहाड़ के लिए बेकार समझी जाती थी, आज वही पहाड़ की ताकत बनकर उभर रही है।





