ढोल-दमाऊ वादकों के स्थायी मानदेय हेतु ज्ञापन, अमित मेखण्डी ने उठाई मांग

रुद्रप्रयाग। बद्री-केदार धाम की परंपराओं से जुड़े पारंपरिक ढोल-दमाऊ वादकों के हितों को लेकर आज बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट कर स्थायी मानदेय की मांग उठाई गई। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य अमित मेखण्डी द्वारा वादकों को संविदा अथवा स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए स्थायी मानदेय प्रदान करने संबंधी औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया। समिति अध्यक्ष ने विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र एवं सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि केदारघाटी एवं बद्री-केदार धाम में वर्षों से धार्मिक अनुष्ठानों, यात्राओं और मंदिर परंपराओं में ढोल-दमाऊ वादक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। इसके बावजूद कई वादक आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि इन पारंपरिक कलाकारों को सम्मानजनक व्यवस्था के तहत स्थायी मानदेय उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

भेंट के दौरान कहा गया कि ढोल-दमाऊ की ध्वनि केवल संगीत नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा की पहचान है। बाबा केदार और भगवान बद्री विशाल की यात्रा में इन वादकों की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनती है। ऐसे में उनका सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण समय की आवश्यकता है।

समिति अध्यक्ष द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन को क्षेत्र के ढोल-दमाऊ वादकों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है। क्षेत्रवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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