रुद्रप्रयाग। वर्ष 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन केदारनाथ विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज होने लगी हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच कई नामों पर मंथन चल रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी किसी भी संभावित उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
चर्चाओं में सबसे प्रमुख नाम वर्तमान विधायक एवं पूर्व विधायक आशा नौटियाल का है। आशा नौटियाल का केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। उन्होंने वर्ष 2002 और 2007 में भाजपा के टिकट पर लगातार दो बार जीत दर्ज की थी। वर्ष 2012 में उन्हें कांग्रेस की शैलारानी रावत से हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में भाजपा द्वारा शैलारानी रावत को टिकट दिए जाने के बाद आशा नौटियाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत विजयी रहे। वर्ष 2022 में भाजपा ने फिर शैलारानी रावत को उम्मीदवार बनाया और उन्हें जीत मिली। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने एक बार फिर आशा नौटियाल पर भरोसा जताया और उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की।
इसी तरह उत्तराखंड महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत का नाम भी चर्चाओं में शामिल है। शैलारानी रावत की पुत्री होने के साथ-साथ वे संगठनात्मक और सामाजिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय हैं। उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम संभावित दावेदारों में शामिल रहा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी नए और महिला चेहरे पर दांव लगाने का निर्णय लेती है तो ऐश्वर्या रावत भी मजबूत विकल्प बन सकती हैं।
भाजपा के युवा नेताओं में पंकज भट्ट का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। तल्लानागपुर क्षेत्र से आने वाले पंकज भट्ट वर्तमान में भाजपा उत्तराखंड में प्रदेश सह संयोजक (राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं बैठक) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता और युवाओं के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उन्हें भविष्य के मजबूत दावेदार के रूप में देख रहा है।
राजनीतिक चर्चाओं में इन तीन नामों के अलावा कुछ अन्य नेताओं के नाम भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता तथा क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत जनाधार रखने वाले कुछ अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की रणनीति और स्थानीय समीकरणों के आधार पर नए नाम भी उभरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केदारनाथ विधानसभा भाजपा के लिए प्रतिष्ठा वाली सीट है। ऐसे में पार्टी उम्मीदवार चयन में संगठनात्मक सक्रियता, जनाधार, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन, जीत की संभावना तथा केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति जैसे सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगी।
फिलहाल केदारनाथ विधानसभा में भाजपा के संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड ही करेगा। आधिकारिक घोषणा होने तक किसी भी नाम को अंतिम उम्मीदवार मानना जल्दबाजी होगी।





