रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विजय लाल ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर उन्होंने अलग–अलग स्तरों पर अपनी बात रखी थी और इसे लेकर चुनौतीपूर्ण बिंदु भी सामने रखे गए थे। इस मुद्दे को अनुसूचित समाज के लोगों ने काफी समर्थन दिया और समाचार को व्यापक रूप से आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अब तक इस पर कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया है।
विजय लाल ने कहा कि पूरा मामला केवल जिलाधिकारी स्तर तक ही सीमित रह गया और उसके बाद आगे क्या कार्रवाई हुई, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने चिंता जताई कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होगी या सामान्य ही रहेगी। इस अनिश्चितता के कारण अनुसूचित समाज को लगातार असमंजस और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बीते लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए विधानसभा की कोई आरक्षित सीट नहीं आई है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यह विषय सरकार के संज्ञान में आना चाहिए था और इस पर समय रहते स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता विजय लाल ने अनुसूचित समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि अनुसूचित समाज से कोई जनप्रतिनिधि चुना जाता है तो उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह समाज को मिलने वाली सभी सरकारी निधियों, योजनाओं और सुविधाओं की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा करे, ताकि समाज को यह पता चल सके कि उसके हिस्से में क्या आ रहा है और क्या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक अनुसूचित समाज को न तो इन निधियों की पूरी जानकारी दी गई और न ही उसका समुचित लाभ मिल पाया।
विजय लाल ने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अनुसूचित समाज के अधिकार, प्रतिनिधित्व और सम्मान से जुड़ा हुआ है और सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए जल्द स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए।





