रुद्रप्रयाग जनपद में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्यों से उत्पन्न समस्याओं को लेकर अब स्थानीय स्तर पर आंदोलन तेज हो गया है। युवा अधिवक्ता विवेक कठैत ने प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि रात्रि में होने वाली ब्लास्टिंग और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो वह इस पूरे मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाएंगे।
अधिवक्ता विवेक कठैत ने जिलाधिकारी को भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया है कि रेल परियोजना के निर्माण कार्यों के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों के लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि अनुमति के विपरीत रात 10 बजे से तड़के 2 बजे तक ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे ग्रामीणों की नींद और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा निर्माण से निकलने वाले मलबे को नदियों में डंप किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण आसपास रहने वाले बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विवेक कठैत का कहना है कि यदि तय समय के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और जिम्मेदार कंपनियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वह पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।
इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर भी विवेक कठैत को व्यापक समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के पर्यावरण, वन्यजीवों और ग्रामीणों के हितों की आवाज बुलंद की है। कई स्थानीय लोगों ने इसे रुद्रप्रयाग के भविष्य और पर्यावरण की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है और प्रशासन से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।





